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Monday, March 14, 2011

आज का सलाम असांजे के नाम

अर्जुन शर्मा अब मैने एक निर्णय लिया है कि अपने पढऩे लिखने के कमरे व दफ्तर में आस्टेलियाई मूल के हैकर से पत्रकारिता का प्रतिमान बन गए जूलियन असांजे का चित्र अपने गुरुओं के चित्रों की बगल में लगाऊंगा। आज जहां दुनिया भर का मीडिया कूड़ा करकट परोस कर हमारे जीने की आजादी में सेंध लगाने के लिए एक दूसरे से आगे निकलने के लिए छटपटाता दिख रहा है, ऐसे में कोई जूलियन असांजे हमारे सामने पत्रकारिता का नया प्रतिमान स्थापित कर रहा है.
हमारे देश में पत्रकारिता के नाम पर वीर बरखा हो रही है यानि वीर सांघविओं और बरखा दत्तों की चांदी है वहीं दूर देश में विचर रहा वो संत कुछ ही दिनों में वो कुछ कर दिखाने वाला है जिसे कर पाने का साहस हमारे इमानदार प्रधानमंत्री में भी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की इस फटकार के बाद कि जब विदेशों में नम्बर दो का पैसा रखने वाले लोगों की सूचि सरकार के पास पहुंच चुकी है तो सरकार इसे सार्वजनिक करने में क्यों विफल हो रही है। सरकार के इस कार्यकाल में लगता है मनमोहन सिंह को कांग्रेसियों व उनके ठगबंधन प्रबंधकों की गंदगी को साफ करने के बजाए उनको पर्दानशीं करने का काम सौंपा गया है।
आज का सलाम उस जूलियन असांजे को जो शायद आज की तारीख में सुपारी लेकर आदमी को टपकाने वालों के सबसे बड़े निशाने पर होगा क्योंकि दुनिया भर में बैठे सफेदपोश अपना चेहरा बचाने के लिए किस हद तक जा सकते हैं,इसका अंदा•ाा लगाने के लिए किसी खुफिया रिपोर्ट को पुष्टि का आधार बनाने की जरूरत नहीं है। ईश्वर उनको सभी बलाओं से बचाए।
आज का सलाम उस जूलियन असांजे को जिसने बड़े मीडिया घरानों को चुल्लू भर पानी में डूब मरने जैसी अवस्था में ला खड़ा किया है। जो देश के लोगों की गहन समस्याओं पर विचार करने के स्थान पर पेड न्यूज से प्राप्त होने वाले धन को अपनी पुश्तों की कब्रें बनाने के लिए इक्टठा करने में जुटे हुए हैं। जिन्होंने चुनाव का दौर बीत जाने के बावजूद पत्रकारों को नेताओं की हैसियत के हिसाब से ठेके दे रखे हैं। जिन्होंने पत्रकारिता को देश निकाला दे दिया है। जिन्होंने आचार व्यवहार व संस्कार बेच खाए हैं। जो घराने बाजार में कंपनियों का भाव व हस्ती बढ़ाने के बदले करोड़ों के शेयर मुफ्त में लेकर अपना विस्तार करने में जुटे हुए हैं।
आज का सलाम उस जूलियन असांजे को जो अपनी वैबसाईट विकीलीक्स के माध्यम से उन भारतीय पात्रों का असली चेहरा दिखाएगा जिन्होंने समाज सेवा के नाम पर विदेशी बैंकों में काला धन गले गले तक भर दिया है। उस असंाजे को सलाम करता हूं जिसकी एक हुंकार के बाद काला धन जमा करने वालों को दस्त लगवा दिए हैं व सारा देश एक नए बदलाव की आशा रखने लगा है।
मुझे विश्वास है कि विदेशी बैंकों में पड़े काले धन के खुलासों के बाद देश में जबरदस्त सियासी भूकंप आएगा जो देश को नई दिशा की तरफ ले जाने वाला साबित होगा। पिछले दिनों एक मेल प्रचुर संख्या में वितरित हुई जिसमें ये गणना थी कि यदि देश के भ्रष्ट नेताओं,अफ्सरों व उद्योगपतियों का विदेशी बैंकों में जमा काला धन देश में आ जाए तो तीस साल तक बिना किसी टेक्स के देश को चलाया जा सकता है। एक भी आदमी बेघर नहीं रहेगा। मैडीकल,शिक्षा सभी को मुफ्त में दी जा सकेगी। वो मेल संदेश एक सपने जैसा था। जूलियन असांजे द्वारा किया जाने वाला पर्दाफाश चाहे इस सपने को सच न भी कर सके पर देश को लूटने वाले चेहरे बेनकाब जरूर होंगे जिसका हमें बड़ी बेसब्री से इंतजार रहेगा।

अनुराग ठाकुर के हिमाचल में लागू है अघोषित 370

अर्जुन शर्माभारतीय जनता पार्टी की युवा शाखा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, हिमाचल के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के पुत्र व हिमाचल की हमीरपुर लोकसभा सीट से सांसद अनुराग ठाकुर आजकल डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के गृह नगर कोलकाता से डा. मुखर्जी की जहां शहादत हुई उस राज्य यानि जम्मू-कश्मीर की यात्रा पर हैं। उन्होंने इस यात्रा में जो मुद्दे जोर शोर से उठाए हैं यदि उन मुद्दों को परख कर उनसे केवल एक सवाल किया जाए तो वे रणछोड़ दास की मुद्रा में भी आ सकते हैं।
उन्होंने सबसे सशक्त तरीके से जो मुद्दा उठाया है वो जम्मू कश्मीर में लगी धारा 370 का है जिसके चलते कोई भी इस प्रदेश से बाहर के प्रदेश का निवासी कामीन नहीं खरीद सकता। अनुराग ये संदेश भांजते फिर रहे हैं कि ये गैर बराबरी वाला मामला समाप्त होने पर ही पूरे देश में जम्मू कश्मीर के लोगों को बराबरी की कामीन मिल सकती है। वैसे उन्होंने धारा 370 को लेकर जो मामला उठाया है उसका फैसला करने की तो बहुत लंबी प्रक्रिया है पर यदि वे सचमुच इस गैर बराबरी को समाप्त करवाना चाहते हैं तो वे इस देश के सामने मिसाल साबित हो सकते हैं। उनके गृह प्रदेश हिमाचल में भी अघोषित धारा 370 लगी हुई है।
कोई भी गैर हिमाचली हिमाचल में कामीन नहीं खरीद सकता। वहां पर भूमि खरीदने के लिए हिमाचली मूल का प्रमाण पत्र होना बहुत जरूरी है। जबकि अनुराग जिस प्राक्सिमा फोर्जिंग कंपनी में हिस्सेदार है वो जालंधर में स्थित है। क्या अनुराग ठाकुर इस गैर बराबरी के हो रहे सुलूक को समाप्त करने के मामले में अपने पिता श्री को मनाएंगे? जो इस ससमय हिमाचल में बहुमत प्राप्त सरकार के मुखिया यानि मुख्यमंत्री हैं? यदि अनुराग हिमाचल में हो रहे इस गैर बराबरी के सलूक को समाप्त करवा दें तो ये मान लिया जाएगा कि वे सचमुच गैर बराबरी के विरोधी हैं वर्ना यही कहा जाएगा कि सियासत करो पर जरा संभल कर,कहीं लेने के देने न पड़ जाएं।